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Maharashtra महाराष्ट्र: मुंबई में भारी बारिश के दौरान एक स्कूल बस पर पेड़ गिरने से एक छात्र की मौत के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक घटना ने नगर प्रशासन की तैयारियों और शहर में मौजूद पुराने एवं खतरनाक पेड़ों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी के चलते ठाणे की मेयर शर्मिला पिंपलोलकर ने शहर में तत्काल सुरक्षा सर्वे कराने के आदेश जारी किए हैं।
यह घटना उस समय हुई जब बारिश के कारण शहर में सामान्य जनजीवन प्रभावित था और कई जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। इसी दौरान एक स्कूल बस पर अचानक एक बड़ा पेड़ गिर गया, जिससे बस में बैठे एक छात्र की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।
इस हादसे को गंभीरता से लेते हुए ठाणे की मेयर शर्मिला पिंपलोलकर ने बुधवार को ठाणे महानगरपालिका (TMC) के ट्री अथॉरिटी विभाग की एक आपात बैठक बुलाई। इस बैठक में शहर में मौजूद पुराने, कमजोर और खतरनाक पेड़ों की तत्काल पहचान करने और उनकी स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए गए।
मेयर ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि स्कूलों, कॉलेजों, हाउसिंग सोसाइटी परिसरों, अस्पतालों और बड़े ट्रैफिक जंक्शनों के भीतर मौजूद सभी पेड़ों का विस्तृत निरीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और समय रहते कार्रवाई जरूरी है।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि जो पेड़ जर्जर अवस्था में हैं या जिनके गिरने की आशंका है, उन्हें तुरंत हटाने या छंटाई (ट्रिमिंग) की कार्रवाई की जाए। साथ ही उन स्थानों की सूची तैयार करने को कहा गया है जहां बड़े और पुराने पेड़ मानव सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।
मेयर ने बैठक में यह भी कहा कि बारिश के मौसम में इस तरह की घटनाएं और अधिक खतरनाक हो जाती हैं, क्योंकि मिट्टी नरम होने और तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए पूरे शहर में एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से सर्वे करना जरूरी है।
नगर प्रशासन ने इस घटना के बाद स्कूलों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी बढ़ाने की बात कही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करें और प्राथमिकता के आधार पर खतरनाक पेड़ों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई जगह पुराने पेड़ लंबे समय से जर्जर हालत में हैं, लेकिन उनकी समय पर देखभाल नहीं की जाती। इसी लापरवाही के कारण ऐसे हादसे सामने आते हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नियमित रूप से पेड़ों का निरीक्षण किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
इस घटना के बाद शहर में स्कूल सुरक्षा को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। अभिभावकों ने चिंता जताई है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल मार्गों और परिसर के आसपास मौजूद पेड़ों और अन्य संरचनाओं की नियमित जांच होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में पुराने पेड़ों की नियमित कटाई-छंटाई और स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है, खासकर मानसून से पहले। यदि समय पर यह कदम उठाए जाएं तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
नगर निगम के ट्री अथॉरिटी विभाग ने सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। टीमें विभिन्न क्षेत्रों में भेजी जाएंगी और पेड़ों की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां जोखिम अधिक है, जैसे स्कूल परिसर, अस्पताल, भीड़भाड़ वाले चौराहे और आवासीय क्षेत्र। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर शहरी सुरक्षा व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाए जाएंगे।





